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कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ होता है असà¥à¤¥à¤®à¤¾? असà¥à¤¥à¤®à¤¾ होने पर शरीर में होते हैं कौन से बदलाव, जानिठसबकà¥à¤›
असà¥à¤¥à¤®à¤¾ à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ है, जिसमें मरीज की सांस की नली में सूजन आ जाती है और सांस की नली धीरे-धीरे सिकà¥à¤¡à¤¼à¤¨à¥‡ लगती है और मरीज को सांस लेने में परेशानी होने लगती है।
असà¥à¤¥à¤®à¤¾ à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ बीमारी है, जो आम तौर पर à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ हà¥à¤ˆ है। असà¥à¤¥à¤®à¤¾ के महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ कारकों में वातावरण में धूल, धà¥à¤† जैसे कण हमारे सांस लेने के साथ ही हमारी शà¥à¤µà¤¾à¤¸ नली में पहà¥à¤‚च जाते हैं और वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को सांस लेने में दिकà¥à¤•त होने लगती है। यही सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ आगे चलकर धीरे-धीरे असà¥à¤¥à¤®à¤¾ का रूप ले लेती है। शà¥à¤°à¥€ बालाजी à¤à¤•à¥à¤¶à¤¨ मेडिकल इंसà¥à¤Ÿà¤¿à¤Ÿà¥à¤¯à¥‚ट में सीनियर कंसलटेंट, रेसà¥à¤ªà¤¿à¤°à¥‡à¤Ÿà¤°à¥€ मेडिसिन डॉ. अनिमेष आरà¥à¤¯ बताते हैं कि असà¥à¤¥à¤®à¤¾ à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ है, जिसमें मरीज की सांस की नली में सूजन आ जाती है और सांस की नली धीरे-धीरे सिकà¥à¤¡à¤¼à¤¨à¥‡ लगती है और मरीज को सांस लेने में परेशानी होने लगती है।
देश में नियमित रूप से असà¥à¤¥à¤®à¤¾ रोगियों की संखà¥à¤¯à¤¾ में बढ़ोतà¥à¤¤à¤°à¥€ होती जा रही है और बता दें कि à¤à¤¾à¤°à¤¤ में 2 से 3 करोड़ लोग असà¥à¤¥à¤®à¤¾ से पीड़ित है। असà¥à¤¥à¤®à¤¾ जैसे रोग से बचाव के लिठसबसे जरूरी है कि आप सबसे पहले यह पहचान कर लें कि आप के शरीर में जो लकà¥à¤·à¤£ दिखाई दे रहे हैं वो असà¥à¤¥à¤®à¤¾ के हैं या नहीं। दरअसल हर सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में सांस का फूलनाअसà¥à¤¥à¤®à¤¾ का लकà¥à¤·à¤£ नहीं होता है लेकिन अगर किसी को असà¥à¤¥à¤®à¤¾ है तो उसकी सांस फूलना à¤à¤• पà¥à¤°à¤®à¥à¤– लकà¥à¤·à¤£ में शामिल है।
असà¥à¤¥à¤®à¤¾ के रोगियों में दिखाई देने वाले लकà¥à¤·à¤£
1-सांस फूलना
2- सांस लेते समय सीटी की आवाज आना
3- लमà¥à¤¬à¥‡à¤‚ समय तक खांसी आना
4-सीने में दरà¥à¤¦ की शिकायत होना
5-सीने में जकड़न होना।
असà¥à¤¥à¤®à¤¾ रोग की सही पहचान के लिठवà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ का पलà¥à¤®à¥‹à¤¨à¤°à¥€ फंकà¥à¤¶à¤¨ टेसà¥à¤Ÿ बहà¥à¤¤ जरूरी होता है और इसी टेसà¥à¤Ÿ के जरिठवà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ में असà¥à¤¥à¤®à¤¾ की पहचान की जाती है।
कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ होता है असà¥à¤¥à¤®à¤¾
असà¥à¤¥à¤®à¤¾ की बीमारी किसी à¤à¥€ आयॠवरà¥à¤— के वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को शिकार बना सकती है, जिसका पà¥à¤°à¤®à¥à¤– कारण हैः
1- खराब दिनचरà¥à¤¯à¤¾
2- खान-पान का ठीक ना होना
3- असà¥à¤¥à¤®à¤¾ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ जागरूकता की कमी है।
à¤à¤¾à¤°à¤¤ में असà¥à¤¥à¤®à¤¾ के करीब 20 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ à¤à¤¸à¥‡ मरीज हैं, जिनकी उमà¥à¤° 14 साल से à¤à¥€ कम है। डॉ. आरà¥à¤¯ के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•, असà¥à¤¥à¤®à¤¾ जैसी सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ से पीड़ित वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ नाक से ठीक पà¥à¤°à¤•ार से सांस नही ले पाता और मà¥à¤‚ह से सांसलेता है। दरअसल असà¥à¤¥à¤®à¤¾ से पीड़ित वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के सांस की नली में सूजन हो जाती है, जिससे नलियां सिकà¥à¤¡à¤¼à¤¨à¥‡ लगती है और वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को सांस लेने में परेशानी होती है।
असà¥à¤¥à¤®à¤¾ के खतरे को बढ़ाने वाले अनà¥à¤¯ कारक
पà¥à¤°à¤¦à¥‚षण, तापमान में बदलाव, à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€, धूमà¥à¤°à¤ªà¤¾à¤¨, धूल और धà¥à¤à¤‚ के समà¥à¤ªà¤°à¥à¤• में आने से à¤à¥€ असà¥à¤¥à¤®à¤¾ का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा ये सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ घर में धूल या पालतू जानवरों से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के कारण à¤à¥€ बढ़ जाती है। बात करें पà¥à¤°à¤¦à¥‚षण की तो बढ़ता पà¥à¤°à¤¦à¥‚षण à¤à¥€ असà¥à¤¥à¤®à¤¾ के मà¥à¤–à¥à¤¯ कारणों में शामिल है। दूषित हवा में सांस लेने से पà¥à¤°à¤¦à¥‚षित ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ हमारे फेफड़ों में पहà¥à¤‚चती है, जिससे सांस लेने में परेशनी होने लगती है। इससे बचने के लिठबाहर निकलते समय अचà¥à¤›à¥€ गà¥à¤£à¤µà¤¤à¥à¤¤à¤¾ वाले मासà¥à¤• का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— करे अपने मà¥à¤‚ह को ढ़ककर रखें।
वायरल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ à¤à¥€ असà¥à¤¥à¤®à¤¾ का कारण
वायरल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ à¤à¥€ à¤à¤• à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार की à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है, जिसके कारण आप बार-बार सरà¥à¤¦à¥€, बà¥à¤–ार से परेशान हो सकते हैं। असà¥à¤¥à¤®à¤¾ की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ वायरल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ से होती है और इससे बचने के लिठसंतà¥à¤²à¤¿à¤¤ जीवनशैली अपनाना ही à¤à¤• मातà¥à¤° विकलà¥à¤ª है। इसके साथ सही समय पर डॉकà¥à¤Ÿà¤° से इलाज कराà¤à¤‚ ताकि à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ में परेशानी का सामना न करना पड़े।
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